Friday, 6 December 2019

आप जो चिकन खाते हैं, जाने उसे कौन-कौन सी दवाएं दी जाती हैं

चिकन के जरिए मानव शरीर में कई तरह के एंटीबायोटिक्स पहुंच रहे हैं जिसका लोगों को अंदाजा भी नहीं है. मुर्गे-मुर्गियों को बीमारियों से बचाने और उनका तेज गति से विकास करने के लिए उन्हें इंजेक्शन के जरिए दवाएं दी जाती हैं. इस मामले में भारत सबसे आगे हैं.
आप जो चिकन खाते हैं, जाने उसे कौन-कौन सी दवाएं दी जाती हैं
आमतौर पर मुर्गे-मुर्गियों को दिए जाते हैं ये एंटीबायोटिक्स
-ऑक्सीटेट्रासाइक्लिन
-क्लोर टेट्रासाइक्लिन
-डॉक्सीसाइक्लिन-एनरोफ्लॉक्सिन सिप्रोफ्लॉक्सिन
-नियोमाइसिन
-एमिनोग्लाइकोसाइड
एंटीबायोटिक इंसानों के लिए बहुत खतरनाक है. इनसे मानव सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है. भारत में हर साल इस वजह से 57000 नवजात शिशुओं की मौत हो जाती है, क्योंकि एंटीबायोटिक्स का असर मां के जरिए बच्चों पर भी पड़ता है.
हर साल कितने एंटीबायोटिक खिलाए जाते हैं
फरवरी 2018 में एक रिपोर्ट जारी की गई जिसमें बताया गया कि भारत में पोल्ट्री और मीट के लिए पाले जाने वाले पशुओं को हर साल 2700 टन एंटीबायोटिक दिए जा रहे हैं. इन एंटीबायोटिक्स की मदद से मुर्गे-मुर्गियां हेल्दी रहते हैं और उन्हें बीमारियां होने का खतरा कम रहता है.
कोलिस्टी एंटीबायोटिक्स भी दिया जाता है
द ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म की वेबसाइट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि मुर्गियों को बीमारी से बचाने के लिए कोलिस्टी नामक एंटीबायोटिक दिया जाता है जिसका इस्तेमाल गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए किया जाता है. लेकिन यह पर्यावरण के लिए जहर के समान है. कोलिस्टीन को लेकर डॉक्टरों की राय है कि इसका इस्तेमाल निमोनिया जैसे इन्फेक्शन को दूर करने के लिए किया जाता है. बता दें कि जो दवाएं मुर्गियों को दी जाती हैं वह मानव शरीर पर दवाइयों का असर ही नहीं होने देती हैं.