Monday, 20 April 2020

कोरोना के बीच सीएम योगी आदित्यनाथ के पिता का हुआ निधन...

व्यवस्था कैसे न सुधरे, जब सत्ताधीश ही आगे बढ़कर मिसाल पेश करें। कोरोना के बीच सीएम योगी आदित्यनाथ के पिता का निधन हुआ तो लॉकडाउन का पालन करते हुए उन्होंने उनके अंतिम अंतिम संस्कार से भी दूर रहने का फैसला लिया। आबादी में सबसे अधिक होते हुए भी उत्तर प्रदेश में कोरोना का प्रकोप नियंत्रित है। इसकी वजह यही है कि शासन-प्रशासन अपनी जिम्मेदारी में दुरुस्त है। योगी आदित्यनाथ जानते हैं कि पिता के अंतिम दर्शन के लिए उनके जाने से हुजूम उमड़ सकता है, जो समस्या का कारण बनेगा। कोटा से छात्रों को लेने और आनंद विहार से मजदूरों को लेने के लिए बसें भेजने वाले मुख्यमंत्री का यह फैसला भावनात्मक रूप से बेहद कठिन रहा होगा। सच में संन्यासी भाव वाला व्यक्ति अच्छा शासक हो सकता है...
सीएम योगी आदित्यनाथ को सूचना थी कि उनके पिता आनंद सिंह बिष्ट की तबीयत अत्यंत गंभीर है। सीएम योगी आदित्यनाथ को पिता के निधन की जानकारी मिली तो उस दौरान वो टीम 11 की बैठक ले रहे थे। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद सीएम की आंखें कुछ देर के लिए नम हो गई।  मुख्यमंत्री अमूमन मीटिंग के दौरान चेहरे पर लगे मास्क को नीचे रखते हैं लेकिन आज ऐसा नहीं हुआ। इससे चेहरे का भाव भले कुछ हद तक छिप जा रहा था,पर आंखों की उदासी,उनकी नमीं बता रही थीं कि सब कुछ ठीक नही। बावजूद इसके राजधर्म का पालन पहली प्राथमिकता पर रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समयानुसार मीटिंग शुरू की। टीम 11 के अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री विचार-विमर्श और कोरोना को लेकर प्रदेश की हालात पर चर्चा करते और अधिकारियों को निर्देश भी देते रहे। इसी बीच करीब 10 बजकर 44 मिनट के आसपास मीटिंग में उस व्यक्ति का आना हुआ, जिसे कम ही किसी मीटिंग में आते देखा गया है। बात मुख्यमंत्री के सबसे करीबी शख्स यानी बल्लू राय की हो रही है। बल्लू के चेहरे पर दुख का भाव झलक रहा था। बल्लू ने एक पर्ची मुख्यमंत्री को दी। इसे पढ़कर मुख्यमंत्री ने किसी से बात कराने का निर्देश बल्लू को दिया। बल्लू ने फोन लगाया और मुख्यमंत्री बात करने लगे। बात महज एक मिनट की रही होगी और मुख्यमंत्री ने फोन पर कहा कि वह मीटिंग के बाद फिर बात करेंगे। बल्लू चले गये मुख्यमंत्री कुछ सेकंड के लिए शांत हो गए। फिर उन्होंने मीटिंग में अधिकारियों से सवाल-जवाब करना शुरू कर दिया। मीटिंग ठीक वैसे ही चलती रही जैसे रोजाना चलती है।