Wednesday, 5 February 2020

मिडिल ओवर में खूब जमेगा रंग...जब जमेगी श्रेयस अय्यर और केएल राहुल की जोड़ी


हैमिल्टन. पहले वनडे में विशाल स्कोर बनाने के बावजूद भारत भले ही हार गया हो लेकिन इस मैच में जिन दो बल्लेबाज़ों ने अपना जलवा बिखेरा वो आने वाले कई सालों तक भारतीय मिडिल ऑर्डर की नई पहचान बन सकते हैं. ना सिर्फ वन-डे या टी20 क्रिकेट में बल्कि टेस्ट क्रिकेट में भी ठीक उसी तरह जैसे कभी राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की जोड़ी टेस्ट में या धोनी-युवराज की जोड़ी सफेद गेंद की क्रिकेट में हुआ करती थी.



नंबर 4 पर अय्यर का शतक खासपिछले 5 सालों में सिर्फ 4 बल्लेबाज़ों ने भारत के लिए नंबर 4 पर बल्लेबाज़ी करते हुए वन-डे क्रिकेट में शतक लगाया है. आखिरी बार, ये कमाल दिखाने वाले खिलाड़ी अंबाती रायडू थे जिन्होंने 2018 में आखिरी बार भारत के लिए इस पोज़िशन पर बल्लेबाज़ी करते हुए शतक जमाया था. श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) ने हैमिल्टन वन-डे में जब शतक लगाया तो कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री सबसे ज़्यादा खुश हुए होंगे. वजह ये है कि टीम मैनेजमेंट हर हाल में चाहता है कि इस नंबर पर उन्हें एक कामयाब खिलाड़ी मिले. आखिर इसी कमी के चलते भारत को वर्ल्ड कप गंवाना पड़ा.


वर्ल्ड कप से पहले टीम मैनेजमेंट ने सिर्फ अय्यर को ही सबसे कम मौके देकर उन्हें नंबर 4 की दौड़ से बाहर कर दिया था. अय्यर के अलावा दर्जनों बल्लेबाज़ आजमाये गये लेकिन कोई इस मुश्किल नंबर पर सहज़ नहीं दिखा. अपने पहले तीन वन-डे मैचों में 2 अर्धशतक लगाने के बाद अय्यर को सिर्फ इसलिए दौड़ से बाहर कर दिया गया क्योंकि साउथ अफ्रीका में सिर्फ 2 मैचों में उनका स्कोर 18 और 30 रहा था. फरवरी 2018 के बाद वर्ल्ड कप 2019 तक अय्यर को किसी ने याद भी नहीं किया जबकि वो इस दौरान इंडिया ए, रणजी ट्रॉफी और आईपीएल में रन बनाते रहे।.

अय्यर हैं भविष्य के कप्तान!
इरफान पठान ने हाल में बताया कि एक बार अय्यर मुंबई टीम के साथ उनके घर आये थे और जो सबसे अच्छी बात उन्हें अय्यर की लगी वो था उनका टैम्प्रामेंट. इरफान ही नहीं कई जानकार उन्हें भविष्य के कप्तान के तौर पर एक विकल्प देखतें हैं. इसे महज़ इत्तेफाक नहीं कहा जा सकता कि ऑस्ट्रेलिया के सबसे कामयाब कप्तान ने आईपीएल के बीच में गौतम गंभीर से इस्तीफा दिलाकर अय्यर (Shreyas Iyer)को कप्तानी दिलवायी थी. आखिर, पोंटिंग ने ही रोहित शर्मा को मुंबई इंडियंस का कप्तान बनाया था और उसके बाद इतिहास गवाह है कि रोहित की कप्तानी और बल्लेबाज़ी में कितना बदलाव आ गया. अय्यर भी अपने मुंबई के साथी सीनियर के नक्शे कदम पर चल रहें हैं.



केएल राहुल भी हैमिल्टन में छा गए
हैमिल्टन वन-डे में अय्यर की पारी से भी बेहतर स्ट्रोक प्ले दिखाया के एल राहुल (KL Rahul) ने. राहुल के साथ भी देखिये क्या अजीब हालात हो रहें है. टी20 सीरीज़ के दौरान वो भारत के सबसे कामयाब बल्लेबाज़ रहे और मैन ऑफ द सीरीज़ बने. वन-डे सीरीज़ में उन्होंने हैमिल्टन में धुआंधार शुरुआत की लेकिन, वो अगले हफ्ते भारत वापस लौट जायेंगे. टेस्ट क्रिकेट के लिए उन्हें टीम में जगह नहीं मिली है.पृथ्वी शॉ टीम में हैं, मयंक अग्रवाल टीम में हैं यहां तक कि शुभमन गिल भी हैं लेकिन न्यूज़ीलैंड दौरे पर अब तक के सबसे कामयाब बल्लेबाज़ टेस्ट टीम में नहीं होगें. जबकि राहुल एक ओपनर होने के साथ-साथ मिडिल ओवर में भी बल्लेबाज़ी का विकल्प दे सकते हैं.



मैच विनर हैं केएल राहुल
कप्तान विराट कोहली और रोहित शर्मा के बाद मौजूदा भारतीय टीम में केएल राहुल (KL Rahul) सिर्फ तीसरे ऐसे बल्लेबाज़ हैं जो क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में सहज़ हैं और मैच विनर हैं. लेकिन 2018 में ओवल टेस्ट में इंग्लैंड के ख़िलाफ 149 रन की पारी खेलने के बाद से बाकि 12 पारियों में राहुल के बल्ले से एक भी अर्धशतक नहीं निकला. पूर्व मुख्य चयनकर्ता एम एस प्रसाद की दलील थी राहुल को बहुत मौके दिए गये लेकिन उनके खेल में निरंतरता की कमी रही है. इस बात में भी दम था लेकिन राहुल के पूरे टेस्ट करियर को देखें तो यही बात देखने को मिलती रही है. पहली 2 पारियों में 3 और 1 के बाद उन्होंने शतक जमाया. अगली तीन पारियों में वो 20 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाये लेकिन फिर उसके बाद शतक. अगली तीन पारियों में हर मौके पर सिर्फ 2 रन लेकिन उसके बाद फिर से शतक और अर्धशतक. उसके बाद फिर से अगली 6 पारियों में कोई भी अर्धशतक नहीं लेकिन फिर चेन्नई में सिर्फ 1 रन से दोहरे शतक से चूके. लेकिन 2017 के फरवरी महीने से लेकर नवंबर तक ऐसा भी दौर आया जब राहुल ने 11 पारियों में से 9 पारियों में अर्धशतक का आंकड़ा पार किया.



लेकिन, राहुल (KL Rahul) को क्या उनके पूराने टेस्ट आकंड़ों से उनके चयन को देखना था या मौजूदा फॉर्म को देखते हुए उन्हें गिल से बेहतर विकल्प माना जा सकता था? अगर राहुल को भविष्य का बड़ा खिलाड़ी माना जा रहा है और टीम इंडिया उन्हें राहुल द्रविड़ की ही तरह विकेटकीपर-बल्लेबाज़ के तौर पर सफेद गेंद की क्रिकेट में नियमित तौर पर खिलाने का इरादा रखती है तो क्या उनकी हौसला-अफज़ाई के लिए, न्यूज़ीलैंड में बेहतरीन फॉर्म दिखाने पर और ख़ासकर तब जब अनुभवी रोहित शर्मा दौरे से बाहर हो गये तो क्या उन्हें फिर से एक और मौका नहीं दिया जा सकता था? ऐसा नहीं है कि भारतीय क्रिकेट में ऐसा होता नहीं है या फिर हुआ नहीं है. रोहित को प्रतिभा और क्लास के नाम पर ही शुरुआती नाकामियों के बावजूद कितने मौके दिए गये. शायद राहुल इस दौरे पर आखिर तक रुकने के हकदार थे.