Thursday, 12 December 2019

B'Day Spcl: जाते-जाते सभी को रुला गए थे युवराज, बेटे के संन्यास पर फूट-फूटकर रोई थीं मां

कभी टीम इंडिया की मध्यक्रम बल्लेबाजी की रीढ़ रहे युवराज सिंह आज 38 साल के हो गए। 12 दिसंबर को चंडीगढ़ में भारत के सबसे बड़े मैन विनर ने 10 जून 2019 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। युवराज सिंह का अंतरराष्ट्रीय करियर उतार-चढ़ाव वाला रहा, लेकिन 19 साल के अपने क्रिकेट करियर में एक दशक से भी ज्यादा समय तक वह टीम इंडिया के संकटमोचक रहे।
मुंबई में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा करने के दौरान युवराज बेहद भावुक हो गए थे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात की थी। अपने दिल की कसक बयां की। अधूरी इच्छा का इजहार कर दिया। मन की वह बात कह दी, जो उन्हें अंदर ही अंदर खाए जा रही थी।
युवराज ने कहा था कि, 'मैं बता नहीं सकता कि क्रिकेट ने मुझे क्या और कितना दिया है। मैं यहां बताना चाहता हूं कि मेरे पास आज जो कुछ है, क्रिकेट ने दिया है। क्रिकेट ही वह वजह है, जिसके कारण मैं आज यहां बैठा हूं।' इस दौरान उनकी आंखें डबडबा गई। इस दौरान उनका परिवार भी साथ था। मां शबनम एकदम अपने बेटे को देखती रहीं थीं। आंखों से आंसू बहते गए।
अपने वक्तव्य के अंत में युवराज ने अपने इस शानदार सफर के लिए परिवार और खासकर मां का धन्यवाद दिया था। युवराज ने कहा था कि, 'मैं अपने परिवार, खासतौर पर मां का धन्यवाद करना चाहूंगा, जो आज मेरे साथ यहां मौजूद हैं। मेरी मां हमेशा से मेरे लिए शक्ति का स्रोत रही है और इन्होंने मुझे दो बार जन्म दिया है।' पूरे घटनाक्रम के दौरान शबनम सिंह बेहद भावुक दिखीं।
युवराज सिंह ने अपनी पत्नी हेजल कीच का भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, 'मेरी पत्नी ने कठिन समय में मेरा साथ दिया है। मेरे करीबी दोस्त, जो मेरे कारण बीमार पड़ जाते थे, लेकिन इसके बावजूद हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। मैं जिन लोगों से प्यार करता हूं, आज वे सब मेरे साथ हैं, सिवाय मेरे पिता के। इसलिए मेरे लिहाज से यह आगे बढ़ने का सबसे अच्छा समय है।'
युवराज ने कहा, '2011 विश्व कप जीता, चार बार 'मैन ऑफ द मैच' और 'मैन ऑफ द टूर्नामेंट' बनना मेरे लिए किसी सपने के सच जैसा होना था। इसके बाद मुझे पता चला कि मैं कैंसर से पीड़ित हूं। उस सच को मैंने आत्मसात किया। जब मैं अपने करियर के सर्वोच्च मुकाम पर था, तभी यह सब हुआ।'
युवराज ने कैंसर पर विजय पाकर भारतीय टीम में वापसी की। 2016 चैंपियंस ट्रॉफी में भी खेले, लेकिन इसके बाद बीसीसीआई उनसे परे देखना शुरू कर चुका था। फिर खराब फॉर्म और फिटनेस ने उनका करियर डुबा दिया।
युवराज खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें भारत के लिए 400 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका मिला। 2002 नेटवेस्ट ट्रॉफी फाइनल, 2004 में लाहौर में पहला टेस्ट शतक, 2007 में इंग्लैंड में वनडे सीरीज, 2007 में टी-20 विश्व कप में एक ओवर में छह छक्के और 2011 विश्व कप जीतना युवी के करियर के कुछ अहम माइलस्टोन हैं।