Thursday 15 August 2019

क्या होता है केन्द्रशासित प्रदेश, जो अब कश्मीर भी होने जा रहा है?

आज यानी 5 अगस्त में राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह कश्मीर पर बोल रहे थे. कश्मीर में बीते कई दिनों से बहुत कुछ चल रहा है. 4 अगस्त की रात से कश्मीर के कई नेता नज़रबंद हैं और कश्मीर में इन्टरनेट और फोन सेवाएं स्थगित हैं. इस पर छाए धुंधलके पर बात करते हुए अमित शाह ने चार बड़े संकल्पों का ऐलान किया.
  1. जम्मू-कश्मीर में से धारा 370 ख़त्म करने की बात की.
  2. जम्मू-कश्मीर में से लद्दाख को निकालकर अलग राज्य घोषित किया.
  3. जम्मू-कश्मीर को केन्द्रशासित प्रदेश यानी (Union Territory) घोषित किया.
  4. लद्दाख को भी केन्द्रशासित प्रदेश घोषित करने की बात की.
इसी बहाने हम आपको ये बताना चाह रहे हैं कि ये केन्द्रशासित प्रदेश होते क्या हैं? इनके तहत किसी राज्य के क्या अधिकार होते हैं? वहां क़ानून किसका और कैसा होता है? और किसी केंद्रशासित प्रदेश में प्रशासनिक और जनसुविधाओं के कार्य कौन करता है?
क्या होते हैं केंद्रशासित प्रदेश?
हम राज्यों के विधानसभा चुनाव देखते हैं. इन राज्यों के वोटर अपने क्षेत्र का विधायक चुनते हैं और विधायक पहुंचते हैं विधानसभा, जहां राज्य के नागरिकों के लिए कानून बनाए जाते हैं. यानी, विधानसभाओं से शासित राज्यों में राज्य सरकार के नियम काम करते हैं, साथ ही साथ राज्य की पुलिस पर कानून व्यवस्था का भार होता है.
इस राज्य में दो राज्य काटे जाएंगे. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख.
इसके उलट केन्द्रशासित प्रदेशों में केंद्र में मौजूद भारत सरकार का राज होता है. ये तो नाम से ही स्पष्ट है. ‘केंद्र’ द्वारा ‘शासित’. केंद्र सरकार के नियम चलते हैं और इन प्रदेशों की पुलिस केंद्र के निर्देशों पर चलती है. इन राज्यों में केंद्र के कानूनों का पालन हो और उन्हें सुचारु रूप से लागू किया जा सके, इसके लिए केंद्र उपराज्यपाल – अंग्रेजी में कहें तो लेफ्टिनेंट गवर्नर – या प्रशासक यानी एडमिनिस्ट्रेटर की नियुक्ति करता है. इन उपराज्यपालों की खबरें आप सुनते रहते हैं. पुदुच्चेरी की राज्यपाल किरण बेदी के बयानों की वजह से पिछले दिनों हंगामा हुआ था और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से ठनी रहती है.
कुछेक केंद्रशासित प्रदेशों में विधानसभाएं भी होती हैं, लेकिन उनके अधिकार सीमित होते हैं. उनके बारे में आगे बताएंगे.
भारत में कुल कितने केंद्रशासित प्रदेश हैं?
अब तक हैं 7 :
1. अंडमान-निकोबार
2. चंडीगढ़
3. दादर और नगर हवेली
4. दमन और दीव
5. दिल्ली का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र
6. लक्षद्वीप
7. पुदुच्चेरी
अगर लद्दाख और जम्मू-कश्मीर जुड़ जाएं तो होंगे 9. इन राज्यों में केंद्र सरकार के नियम और प्रशासनिक महकमा को सबसे ऊपर रखा जाता है.
क्यों बनते हैं केंद्रशासित प्रदेश?
अगर कोई राज्य या जगह इतना दूर हो, जिसकी वजह से उस पर किसी प्रदेश की शासन व्यवस्था लागू न हो सकती हो; या उस राज्य की संरचना या सांस्कृतिक विरासत इतनी अद्भुत हो, जिस वजह से उसे किसी राज्य में सम्मिलित न क्या जा सकता हो; या वो राज्य इतना छोटा हो, जिसकी वजह से उसे अलग राज्य न बनाया जा सकता हो; या राज्य के पास कोई विशेष दर्जा हो, जैसे दिल्ली, या अब जैसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख. इन वजहों से बनाए जाते हैं केंद्रशासित प्रदेश.
भारत के नक़्शे में छोटा-सा दिखने वाला लक्षद्वीप भी एक केन्द्रशासित प्रदेश है.
आसान भाषा में कहें तो केंद्र इन क्षेत्रों के विकास और कानून व्यवस्था का जिम्मा अपने ऊपर लेता है, और इन राज्यों को केंद्रशासित प्रदेश के तौर पर घोषित कर देता है.
जब संविधान का निर्माण हुआ तो भारत में अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह ही एकमात्र केन्द्रशासित प्रदेश था. धीरे-धीरे इस सूची में दिल्ली, चंडीगढ़ और लक्षद्वीप आए. फिर दादर-नगर हवेली. दमन-दीव और पुदुच्चेरी शामिल हुए.
अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह भी केन्द्रशासित प्रदेश हैं.
केंद्रशासित प्रदेशों के कितने प्रकार होते हैं?
2 तरह के होते हैं. एक तो वो, जहां बेरोकटोक केंद्र का राज चलता है. वहां के कार्यों के लिए किसी विधायिका या विधानसभा की ज़रुरत नहीं होती है. यहां नगरमहापालिका होती है, जो उस केन्द्रशासित प्रदेश का सारा कामकाज देखती है.
और दूसरे वो केंद्रशासित प्रदेश, जिनकी अपनी विधानसभाएं होती हैं. जैसे दिल्ली और पुदुच्चेरी. यहां नियम से पांच सालों में विधानसभा चुनाव होते हैं, और विधानसभा में मिले बहुमत के आधार पर मुख्यमंत्री चुना जाता है. लेकिन फिर भी यहां की पुलिस और कानून व्यवस्था वास्तविक रूप में केंद्र के पास ही होती है. इस तरह के केंद्रशासित प्रदेशों से सांसद भी राज्यसभा में भेजे जाते हैं.
ऐसे केंद्रशासित प्रदेशों में अक्सर राज्य की विधानसभाओं और केंद्र के बीच एक संघर्ष देखा गया है. होता यूं है कि इन केन्द्रशासित प्रदेशों में मौजूद मुख्यमंत्री अगर केंद्र में मौजूद राजनीतिक दल के विपक्ष में होते हैं तो अक्सर वे केंद्र पर यह ठीकरा फोड़ते हैं कि वे उन्हें काम करने नहीं दे रहे हैं. कभी-कभी अमुक प्रदेश को पूर्ण राज्य देने की मांग करते भी हैं. उदाहरण भी दें क्या? खुद से भी समझ ही गए होंगे.
इनकी ही बात हो रही है.
बहरहाल, मौजूदा परिप्रेक्ष्य में बात करें तो लद्दाख को ऐसा केन्द्रशासित प्रदेश बनाया जा रहा है, जहां खुद की कोई विधानसभा नहीं होगी. जबकि जम्मू-कश्मीर केन्द्रशासित प्रदेश में विधानसभा भी होगी, ऐसे में संभव है कि क्षेत्रीय दलों और केंद्र में मौजूद भाजपा के बीच टकराव बढ़ सकता है.
लब्बोलुआब क्या?
ये कि साहब अगर विधानसभा हो या न हो, इन केन्द्रशासित प्रदेशों में सभी स्थितियों पर नियंत्रण केंद्र सरकार का ही होगा.
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