Saturday 17 August 2019

जानिए शादी के सात फेरों के सातों वचनों का मतलब


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सनातन धर्म की परंपरा के अनुसार, विवाह संस्कार के दौरान दुल्हा-दुल्हन के फेरे होते हैं और फेरों के दौरान भावी पति-पत्नी एक-दूसरे को 7 वचन देते हैं। हमने कितनी ही शादियां अटैंड की होंगी, लेकिन शायद ही कभी इन वचनों पर ध्यान दिया हो। आइए जानें, क्या है इन सात वचनों का महत्व…

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हिंदू धर्म में विवाह के सात फेरों का बहुत महत्व है फेरों के दौरान सात वचनों को बोला जाता है, जिसका पालन सभी जोड़े को करना होता है !

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विवाह के समय पति-पत्नी अग्नि को साक्षी मानकर एक-दूसरे को सात वचन देते हैं जिनका दांपत्य जीवन में काफी महत्व होता है। आज भी यदि इनके महत्व को समझ लिया जाता है तो वैवाहिक जीवन में आने वाली कई समस्याओं से निजात पाई जा सकती है।

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सात फेरों में दूल्हा व दुल्हन दोनों से सात वचन लिए जाते हैं. वर-वधू अग्नि को साक्षी मानकर इसके चारों ओर घूमकर पति-पत्नी के रूप में एक साथ सुख से जीवन बिताने के लिए प्रण करते हैं !

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यह वचन भी कन्या के सम्मान और उसकी प्रतिष्ठा को रेखांकित करता है अपनी छठी शर्त में कन्या वर से कहती है यदि वह अपनी सहेलियों, स्त्रियों, परिवार या आस पास अन्य कोई मौजूद हो तो सबके सामने उसका कभी भी अपमान नहीं करेंगें और दुर्व्यसनों (बुरी आदतें जैसे कि शराब, जुआ इत्यादि) से दूर रहेंगें। यदि मेरी यह शर्त आपको मंजूर है तो मैं आपके बांयी और आने को तैयार हूं।

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संख्या सात की महिमा बहुत व्यापक है जिसका विवरण बहुत विस्तृत हो सकता है लेकिन संक्षेप में इतना ही कहा जा सकता है विवाह में फेरों के दौरान सात फेरे सात वचन अर्थात सप्तपदी का महत्व बहुत अधिक इसलिये माना जाता है क्योंकि सात की संख्या बहुत शुभ मानी जाती है। संगीत में सात ही सुर होते हैं!

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