Sunday 25 August 2019

सास बहु सीरियल्स के पहले क्या आता था टीवी पर ? जानिए हिंदुस्तान के कुछ बेस्ट धारावाहिकों के बारे में

credit: third party image reference
इंडिया में सैटेलाइट चैनलों की भरमार है,कहते हैं लगभग 250 चैनल्स तो महज एंटरटेनमेंट चैनल्स हैं उसके ऊपर न्यूज़ चैनल फिर स्पोर्ट्स और कभी न खत्म होने वाली भिन्न भिन्न श्रेणियाँ।सास बहु सीरियलों का आग़ाज़ तथाकथित तौर पर 2000 में हुआ जब 'बालाजी प्रोडक्शन' के तहत बनने वाला सीरियल 'क्योंकि सास भी कभी बहु थी' का प्रसारण हुआ।सीरियल गज़ब का हिट हुआ,स्टार प्लस की लोकप्रियता भी द्विगुणित हुई और फ़िर चैनलों पर सास बहु के अनगिनत कार्यक्रमों की बाढ़ सी आ गयी।आज के युग में जहाँ टेलीविजन भी है और मोबाइल भी,अगर दोनों में विषमता पूछी जाए तो शायद यह होगी कि जहाँ मोबाइल आपका निजी मित्र है वहीं टेलीविजन एक परिवार का सदस्य,जो सम्पूर्ण परिवार का एक साथ मनोरंजन करता है।क्या आज के युग में यह संभव है....?शायद आप कहेंगे नहीं पर किसी ज़माने में था,90 के दशक में या उससे पहले।आइये जानते हैं ऐसे कार्यक्रमों को जो सास-बहु ड्रामा से पहले आते थे,विख्यात थे और सम्पूर्ण परिवार का मनोरंजन करते थे-
1) ब्योमकेश बक्शी
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शरद इंदु बंदोपाध्याय द्वारा रचित यह किरदार ब्योमकेश बक्शी एक जासूस है जो जटिल से जटिल केसों को सुलझाने में सक्षम है।यह सीरियल दूरदर्शन में 1993 में आया करता था जिसमें शीर्षक रोल राजित कपूर ने निभाया था।यदि आप इस सीरियल की रेटिंग IMDB में देखें तो 9.1 है।यदि अंग्रजों के पास शेरलॉक होम्स है तो भारत के पास ब्योमकेश है।
2)मालगुडी डेज़
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आर.के. लक्ष्मण की लघु कथाओं पर आधारित यह कार्यक्रम 1987 में दूरदर्शन पर आया करता था।कहानी है मालगुडी नामक छोटे से शहर में रहने वाले लोगों की और उनकी परेशानियों की जिसे वो किसी तरह से सुलझाते थे।सीरियल की शूटिंग कर्नाटक के शिमोगा जिले के छोटे से गांव अरसलू में हुई है,भारतीय रेल ने अरसलू रेलवे स्टेशन का नाम बदल कर मालगुडी रेलवे स्टेशन रख दिया,इस कार्यक्रम के सम्मान में। IMDB रेटिंग की बात करें तो 9.4 है, 10 में से।इस बेहतरीन सीरियल को आप 'हॉट स्टार' पर देख सकते हैं।
3)महाभारत
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जिस सीरियल के साथ बी.आर चोपड़ा जैसा नाम जुड़ा हो और जिसके निर्देशक रवि चोपड़ा हों,उससे आप क्या आशाएं रख सकते हैं।कुछ लाजवाब ही होगा,1988 में आया महाभारत अप्रतिम धारावाहिक था।महाभारत को दोबारा बनाने की कोशिश की गई 2013 में जो स्टार प्लस पर प्रसारित भी हुआ,नए विज़ुअल्स के साथ,बेहतर तकनीकों के साथ पर शायद उसमें आत्मा नदारद थी।आज भी आप आंख बंद करें और श्री कृष्ण के किरदार के बारे में सोचें तो आपको नितीश भारद्वाज ही नज़र आएंगे,कर्ण के किरदार में पंकज धीर और भीष्म के रोल में मुकेश खन्ना के सिवा आप और कुछ सोच भी नहीं पाएंगे।कहते हैं 1988-90 के बीच जब महाभारत प्रसारित होता था तो सड़कें खाली हो जाती थीं,लोग अपने घरों में सपरिवार टीवी के सामने होते थे।
4)रामायण
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जब महाभारत की बात हो ही गयी है तो रामायण की भी बात कर लेते हैं।1987,रामानंद सागर की सम्पूर्ण रामायण,रवींद्र जैन जी का संगीत।कहते हैं उन दिनों जब रामायण आया करता था तो लोग अपनी पादुकाएं उतार कर देखा करते थे।रामायण के बाद कई सीरियलों को इसी तर्ज पर बनाने की कोशिश की गई जैसे 'सिया के राम'आदि।खैर नई पीढ़ी के लिए ज़रूरी भी है पर कोई भी रामानंद सागर की रामायण के आस पास भी न फटक सका। बता दें कि रामायण का नाम 'लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में दर्ज है दुनिया का सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले पौराणिक सीरियल के रूप में।
5)अलिफ लैला
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'सागर फ़िल्म्स' के द्वारा बनाया गया धारावाहिक अलिफ़ लैला 'अरेबियन नाइट्स' की कथाओं पर आधारित था।1993-97 तक आने वाले इस सीरियल की सभी कहानियाँ दर्शकों ने बेहद पसंद कीं वो चाहे अलीबाबा और चालिस चोर हो,अलादीन और जादई चिराग हो या सिंदबाद जहाजी की कहानी हो।यह धारावाहिक इस क़दर लोकप्रिय था कि इसका प्रसारण बांग्लादेश में भी किया गया।