Thursday 22 August 2019

इस तरह करे घर पर ही प्रेग्नेंसी टेस्ट

प्रेग्नेंसी यानी गर्भावस्था एक ऐसा एहसास है जिसे हर महिला चाहती है । लेकिन कुछ ऐसी भी होती हैं जो इसका नाम सुनकर ही भय जाती हैं । इस दौरान एक महिला के बॉडी में इतने सारे परिवर्तन होते हैं कि 9 महीने का यह सफर कई बार आपको डरा देता है । किसी गर्भवती महिला को दर्द व तकलीफ में देखकर अगर आपको भी प्रेग्नेंट होने से भय लगता है तो आप एक तरह के फोबिया का शिकार हैं व इसे टोकोफोबिया कहते हैं । इसी के बारे में हम बताने जा रहे हैं ।
टोकोफोबिया को पैथोलॉजिकल फियर यानी बीमारी से जुड़ा भय माना जाता है व यह किसी महिला के अंदर उस वक्त पैदा होता है जब वह दूसरी महिला को बच्चे को जन्म देते हुए देखती है व उस वक्त महसूस होने वाला दर्द व तकलीफ की वजह से वह खुद बच्चा पैदा करने को लेकर घबरा जाती है । इसके अतिरिक्त कई बार प्रेग्नेंसी एक बेहद सुखदायक व बेहतरीन अनुभव होने की बजाए कुछ स्त्रियों के लिए तकलीफदेह व कठिनाई से भरा सफर हो सकता है । यहां तक की कुछ स्त्रियों को तो ट्रॉमा जैसा एक्सपीरियंस भी होता है ।
लेकिन आपको बता दें, ऐसा भी नहीं है कि ऐसा हर महिला के ससथ होता है । एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 7 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं टोकोफोबिया यानी बच्चे को जन्म देने के भय के ट्रॉमा से पीड़ित हैं । लेकिन इसका उपचार भी है जिससे आप बाहर निकल सकती हैं । जानते हैं इसका उपचार –
वैसे तो ज्यादातर महिलाएं जो टोकोफोबिया से पीड़ित हों वे खुद ही इस हालात का सामना कर लेती हैं । उन्हें सिर्फ प्रेग्नेंसी के दौरान अपने आसपास मौजूद लोगों व उनकी देखभाल करने वालों से थोड़े सपॉर्ट की आवश्यकता होती है लेकिन ट्रॉमैटिक एक्सपीरियंस से गुजरने वाली महिला के लिए काउंसलिंग महत्वपूर्ण होती है । किसी भी दूसरे फोबिया की तरह टोकोफोबिया के उपचार में भी एक्सपर्ट्स को यह जानने की आवश्यकता होती है कि आखिर इस भय की मुख्य वजह क्या है । टोकोफोबिया के मरीज में अगर डिप्रेशन, ऐंग्जाइटी जैसे लक्षण दिखें तो उन्हें डायरेक्ट थेरपी की आवश्यकता होती है ।
यानी गर्भावस्था एक ऐसा एहसास है जिसे हर महिला चाहती है । लेकिन कुछ ऐसी भी होती हैं जो इसका नाम सुनकर ही भय जाती हैं । इस दौरान एक महिला के बॉडी में इतने सारे परिवर्तन होते हैं कि 9 महीने का यह सफर कई बार आपको डरा देता है । किसी गर्भवती महिला को दर्द व तकलीफ में देखकर अगर आपको भी प्रेग्नेंट होने से भय लगता है तो आप एक तरह के फोबिया का शिकार हैं व इसे टोकोफोबिया कहते हैं । इसी के बारे में हम बताने जा रहे हैं ।
टोकोफोबिया को पैथोलॉजिकल फियर यानी बीमारी से जुड़ा भय माना जाता है व यह किसी महिला के अंदर उस वक्त पैदा होता है जब वह दूसरी महिला को बच्चे को जन्म देते हुए देखती है व उस वक्त महसूस होने वाला दर्द व तकलीफ की वजह से वह खुद बच्चा पैदा करने को लेकर घबरा जाती है । इसके अतिरिक्त कई बार प्रेग्नेंसी एक बेहद सुखदायक व बेहतरीन अनुभव होने की बजाए कुछ स्त्रियों के लिए तकलीफदेह व कठिनाई से भरा सफर हो सकता है । यहां तक की कुछ स्त्रियों को तो ट्रॉमा जैसा एक्सपीरियंस भी होता है ।
लेकिन आपको बता दें, ऐसा भी नहीं है कि ऐसा हर महिला के ससथ होता है । एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 7 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं टोकोफोबिया यानी बच्चे को जन्म देने के भय के ट्रॉमा से पीड़ित हैं । लेकिन इसका उपचार भी है जिससे आप बाहर निकल सकती हैं । जानते हैं इसका उपचार –
वैसे तो ज्यादातर महिलाएं जो टोकोफोबिया से पीड़ित हों वे खुद ही इस हालात का सामना कर लेती हैं । उन्हें सिर्फ प्रेग्नेंसी के दौरान अपने आसपास मौजूद लोगों व उनकी देखभाल करने वालों से थोड़े सपॉर्ट की आवश्यकता होती है लेकिन ट्रॉमैटिक एक्सपीरियंस से गुजरने वाली महिला के लिए काउंसलिंग महत्वपूर्ण होती है । किसी भी दूसरे फोबिया की तरह टोकोफोबिया के उपचार में भी एक्सपर्ट्स को यह जानने की आवश्यकता होती है कि आखिर इस भय की मुख्य वजह क्या है । टोकोफोबिया के मरीज में अगर डिप्रेशन, ऐंग्जाइटी जैसे लक्षण दिखें तो उन्हें डायरेक्ट थेरपी की आवश्यकता होती है ।